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Hind Pocket Books

हिंद पॉकेट बुक्स सन् 2018 में पेंगुइन रैंडम हाउस का हिस्सा बना। ये हमारे लिए अत्यधिक गर्व की बात थी कि हमें देश के सबसे पुराने और सर्वाधिक सम्मानित हिंदी प्रकाशकों में से एक की विरासत को आगे बढ़ाने और भारतीय भाषाओं के अपने प्रकाशन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान का अवसर मिला जिसे सन् 2005 में शुरू किया गया था। एक अग्रणी भारतीय भाषा प्रकाशक होने के नाते हम हर साल 30 नई और 500 पुरानी किताबों का प्रकाशन कर रहे हैं। हमने सफलतापूर्वक कई श्रेणियों में मसलन कथा साहित्य, कथेतर, लोकप्रिय कथा साहित्य, सेल्फ़-हेल्प, अध्यात्म समेत 200 से ज़्यादा बाल साहित्य की पुस्तकों का प्रकाशन किया है जिसमें लिलिपुट एंड ट्वेंटी थाउजेंड लीग्स अंडर द सी जैसे उत्कृष्ट साहित्य के कुछ अनुवाद भी शामिल हैं। हमारा प्रकाशन संस्थान अपने युग के महानतम लेखकों की रचनाओं का खजाना है जिसमें कुछ नाम इस तरह से हैं-मुंशी प्रेमचंद, अमृता प्रीतम, आचार्य चतुरसेन, कृश्न चंदर, गुरुदत्त, दत्त भारती, नरेंद्र कोहली, मुल्कराज आनंद, शरतचंद्र, गौर गोपाल दास, सद्गुरु, ओशो, रुज़बेह एन भरुचा और तिक न्यात हन्ह। साथ ही, हमने पाठकों के बीच अत्यधिक पसंद किए जानेवाले कवियों मसलन हरिवंश राय बच्चन, गोपाल दास नीरज और प्रकाश पंडित को भी प्रकाशित किया है।

हिंद पॉकेट बुक्स समूह की स्थापना सन् 1958 में हुई और इसने सन् 1959 में दस पेपरबैक्स की सेट के साथ भारतीय प्रकाशन जगत में अहम बढ़त हासिल कर ली। एक अग्रणी प्रकाशक के रूप में यह पहला प्रकाशन संस्थान था जिसने भारत में डाक आधारित बुक क्लब की स्थापना की और पूरे देश में पांच लाख सदस्यों को उससे जोड़ा। अपनी स्थापना के बाद से इसने भारतीय समाज की महानतम हस्तियों की रचनाएं प्रकाशित की जिसमें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और दूसरे राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन की रचनाएँ भी शामिल हैं।

पेंगुइन रैंडम हाउस प्रकाशन के वैश्विक परिवार में हिंद पॉकेट बुक्स का शामिल होना एक संयोग ही था। ऐसा कहा जाता है कि हिंद पॉकेट बुक्स के संस्थापक डीएन मलहोत्रा पेंगुइन बुक्स के संस्थापक सर एलेन लेन से ही प्रेरित थे। श्री मलहोत्रा न सिर्फ़ हर व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण साहित्य को पहुँचाना चाहते थे, बल्कि ये भी चाहते थे कि लोग इन साहित्यिक रत्नों को आसानी से वस्तुत: अपनी जेब में रखकर ले जा सकें।

 

Hind Pocket Books became a part of Penguin Random House India in 2018. This was a huge honour for us to build on the legacy of one of the oldest and most respected Hindi language publishers in the country and significant addition to our Indian language-publishing program, which was launched in 2005. As a premier Indian language publisher, we are publishing over 30 new titles and over 500 backlist titles each year. We have successfully published in several genres such as literary fiction and non- fiction, mass-market fiction, self- help and mind-body-spirit as well as we have a collection of over 200 titles for children, which includes the translations of some brilliant classics like Lilliput and Twenty Thousand Leagues Under The Sea. Our publishing house is a treasure trove of written work by legendary writers – Munshi Premchand, Amrita Pritam, Acharya Chatursen Shashtri, Krish Chander, Gurudutt, Dutt Bharti, Narendra Kohli, Mulkraj Anand, Sharadchandra, Gaur Gopal Das, Sadhguru, Osho, Ruzbeh N Bharucha and Thich Naht Hanh, to name a few; Bestselling poets Harivansh Rai Bachchan, Gopal Das Neeraj, and Prakash Pandit.

Hind Pocket Books Group was established in 1958 and it made major headway for Indian publishing with the launch of a set of ten paperbacks in 1959. A trailblazer publisher, it was the first to introduce a mail-order book club in India and grew it to half a million members across the country. Since its inception, it has published works by luminaries of Indian society, including Pandit Jawahar Lal Nehru, India’s first Prime Minister and S Radhakrishnan, the second President of India.

It was serendipitous for Hind Pocket Books to join the Penguin Random House global family of publishers. The founder of the publishing house, DN Malhotra, was said to have been inspired by Sir Allen Lane, founder of Penguin Books. Mr. Malhotra aimed to not only make quality literature accessible to everyone but also have people carry these literary gems easily in their pockets, quite literally!